इस्लामी सपनों की व्याख्या मानव इतिहास की सबसे पुरानी और परिष्कृत सपना विश्लेषण प्रणालियों में से एक है। क़ुरान, हदीस, और सदियों की विद्वानों की टीका में निहित, यह एक ऐसा ढाँचा प्रदान करती है जो चौदह सौ से अधिक वर्षों से मुसलमानों का मार्गदर्शन कर रहा है।
क़ुरान में सपनों का उल्लेख कई स्थानों पर है — हज़रत यूसुफ (अ.स.) की कहानी सपनों की व्याख्या के महत्व को स्पष्ट करती है। हज़रत इब्राहीम (अ.स.) का सपना, फ़िरऔन के सपने — सभी दिव्य संवाद का माध्यम हैं।
हदीस में, पैगम्बर मुहम्मद (स.अ.व.) ने फ़रमाया कि सच्चे सपने नबूवत का छियालीसवाँ हिस्सा हैं। उन्होंने सिखाया कि अच्छे सपने अल्लाह की ओर से हैं और बुरे सपने शैतान की ओर से।
इब्न सिरीन (729 ई.) — सपनों की व्याख्या के सबसे महान विद्वान। उनका दृष्टिकोण: व्याख्या सपने देखने वाले के संदर्भ के अनुसार बदलती है।
इमाम नाबुल्सी — 17वीं शताब्दी के विद्वान जिन्होंने "ता'तीर अल-अनाम" लिखी — सबसे व्यापक सपना शब्दकोश।
सपनों की व्याख्या के इस्लामी शिष्टाचार: अच्छे सपने विश्वसनीय लोगों से साझा करें, बुरे सपने किसी से न बताएँ, बाईं ओर तीन बार थूकें, और अल्लाह की शरण माँगें।
सच्चे सपनों का समय: फ़ज्र से पहले के सपने सबसे सच्चे माने जाते हैं। ईमानदार व्यक्ति के सपने अधिक सच्चे होते हैं।
